जनसंख्या नियंत्रण कानून एवं विरोध पर विशेष

न्यूज 22 इंडिया डेस्क

कहते हैं कि अति सर्वत्र वर्जयते, मतलब साफ है कि अधिकता किसी भी चींज की अच्छी नही बल्कि नुकसानदेह होती है और यह हर क्षेत्र में लागू होता है। तरह देश की प्रगति में जनसंख्या का बहुत महत्व होता है क्योंकि  वंशवृद्धि यानी पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए संतान का होना जरूरी होता है।

जिसके संतान नहीं होती है उसे निर्वंशी कह कर समाज में अशुभ दृष्टि से देखा जाता है।संतान परम्परा अनादि काल से है और हमारे पूज्य देवी देवता पीर पैगम्बर ही नहीं बल्कि त्रिदेवों  के भी संतानें थी।यह सही है कि जिनके कोई संतान नहीं होती है वह लोग कहते हैं कि भगवान मालिक एक अंधी बेटी ही दे दे ताकि निःसंतान के अपयश से बच जाय।

पहले लोग नारी को भोग्या कम धर्म धारिणी देवी स्वरुपा जीवन संगिनी अधिक मानकर घर की लक्ष्मी मानते थे और संतान इच्छा होने पर ही धर्मपत्नी के पास शुभ मूहुर्त निकलवा कर जाते थे।युग परिवर्तन के साथ  संतान प्राप्ति का लक्ष्य भी लक्ष्यहीन होकर परिवर्तित हो गया और पत्नी के पास जाने के लिए शुभ मूहूर्त की जरूरत नहीं रह गई है।

पारिवारिक नियन्त्रण शर्म हया सबकुछ समाप्त हो गई है और शादी होने के बाद से अपने कमरे में पत्नी के साथ रहने में कोई संकोच या भय नहीं रह गया है।लोग पत्नी को एक मात्र शारीरिक सुख देने एवं बच्चा पैदा करने की मशीन एवं खाना आबादी मात्र मानने लगे हैं।

लोकतंत्र की धुरी मानी जाने वाली राजनीति में जबसे जनसंख्या बल के आधार पर “जिसकी जितनी साझेदारी उतनी उसकी भागीदारी” का सिद्धांत लागू हो गया है तबसे कुछ लोग संख्या बल बढ़ाने में जुट गए हैं और एक व्यक्ति के दो या तीन नहीं बल्कि दर्जनों बच्चों की फौज खड़ी कर रहे हैं इसमें आमलोगों के साथ ही राजनेता भी शामिल हैं।

फलस्वरूप जनसंख्या का संतुलन बिगड़ कर असंतुलित होता जा रहा  है और आज जनसंख्या वृद्धि देश के विकास एवं सरकारी प्रयासों में बाधक बनती जा रही है।लोगों के सामने रोजी रोटी कपड़ा मकान की समस्या पैदा होने लगी है और सरकार को भोजन मकान उपलब्ध कराना पड़ रहा है।

कहते हैं कि जिस तेजी के साथ जनसंख्या बढ़ रही है अगर इस पर तत्काल रोक नहीं लगती है तो नदी नाले,खेत खलिहान, तालाब, बंजर, जंगल झाड़ी, बाग बगीचा भी रहने के लिए  कम पड़ जायेगा।जनसंख्या वृद्धि देश के विकास में बहुत बड़ी बाधक बनती जा रही है और सरकार के तमाम संसाधन बौने साबित हो रहे हैं।

सरकार आजादी के बाद से ही जनसंख्या नियन्त्रण करने की दृष्टि से देश में परिवार नियोजन कार्यक्रम चला रही है और लोगों को परिवार वृद्धि से बचाने के तमाम उपाय कर रही है।परिवार नियोजन करने के चक्कर में नसबंदी के नाम पर तत्कालीन इंदिरा सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है।

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वाधीनता दिवस के मौके पर जनसंख्या वृद्धि पर चिंता व्यक्त कर इसे नियन्त्रित करने के लिए जन सामान्य से सुझाव मांगा था जिस पर अधिकांश लोगों ने कानून बनाने का सुझाव दिया था।जनसंख्या वृद्धि पर अर्थ शास्त्री, समाजशास्त्री लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

देश में उत्तर प्रदेश सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है जहाँ की आबादी दुनिया के विभिन्न राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है। चौबीस करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश में जिस गति से आबादी बढ़ रही है उसे देखते हुए प्रदेश के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।

सरकार जब भी जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिए कानून बनाने की बात करती है तो उसे व्यापक विरोध का सामना करना पड़ता है और समुदाय विशेष में तूफान सा जाता है।सरकार की परिवार नियोजन नीति का अनुसरण ऐसा नहीं है कि सभी लोग नही करते हैं तमाम हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई देशवासी इसका अनुसरण करते हैं और दो या तीन बच्चों से अधिक पैदा करने से बचने लगे हैं लेकिन मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग पर लोगों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

कुछ कट्टरपंथी मजहबी लोग एवं राजनेता आबादी वृद्धि को संसदीय लोकतंत्र में अपनी ताकत मानकर लोगों को उकसाने में जुटे हैं और जब जब भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की बात शुरू होती है तब तब वह लोग सहयोग देने की जगह मजहब विरोधी बताकर उसका विरोध करने लगते हैं।

यह सही है कि बच्चे भगवान की देन होते हैं लेकिन यह भी कटु सत्य है कि बच्चों को पैदा करने में मनुष्य का भी योगदान होता है और वह अगर ठान ले तो बच्चों की पैदाइश पर रोक लग सकती है।इधर जनसंख्या दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कानून बनाकर जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए की गई पहल चर्चा का विषय बनी हुई है और विभिन्न दलों से जुड़े मुस्लिम समाज के नेता एवं धार्मिक लोगों की जैसे नींद हराम हो गई है।हम चाहे जो भी तर्क दें

लेकिन यह सत्य है कि कानून मजहब विशेष के लिए नहीं बल्कि सभी लोगों वर्ग समुदायों पर समान रूप से लागू होगा है किन्तु परेशानी सभी लोगों को नहीं हो रही है और भय सिर्फ मुस्लिम समाज के कुछ लोगों को ही हो रहा है।जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए कानून बनाकर उसे कड़ाई के लागू करना समय की पुकार है और जो लोग आबादी के आधार पर सत्ता में सहभागिता का दिवास्वप्न देखते हैं

उनके मनसूबों का नाकामयाब करना होगा।सरकार को देश व प्रदेश हित में इस सम्बंध में कठोर कानून बनाकर उसे जमीनी हकीकत देना जरूरी हो गया है

और इसका उल्लघंन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाना आवश्यक है। इस कानून के दायरे में राजनेता अभिनेता अधिकारी कर्मचारी एवं जन सामान्य को लाना  तथा उल्लघंन करने वालों को विभिन्न सरकारी सुविधाओं एवं विकास योजनाओं से वंचित करना होगा क्योंकि जनसंख्या वृद्धि रोकने का दूसरा कोई उपाय नहीं है।

भोलानाथ मिश्र

वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी

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