विजय दशमी पर दशहरा का आयोजन बड़े ही धूमधाम के साथ किया गया

न्यूज 22 इंडिया

रिपोर्ट-सत्यवान पाल
सूरतगंज बाराबंकी
सूरतगंज कस्बा के दशहरा मैदान में शुक्रवार को अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक विजयादशमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया।

हर साल की भांति इस बार भी दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का पुतला दहन किया गया। पुतला दहन देखने के लिए मैदान में हजाराें लोगो का तांता लग गया।

जो शुक्रवार की सुबह होते ही विजयादशमी को लेकर बच्चों में उत्साह दिखाई दे रहा था। दशहरा मैदान में मेला समिति के कार्यकताओं के द्वारा रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को खड़ा करने में जुट गए।

शाम साढ़े चार बजे के करीब क्षेत्रीय कलाकारो के द्वारा दशहरा मैदान में भगवान श्रीराम की झांकी व सैनिकों की रैली भी निकाली गई। जिसमें लक्ष्मण, जामवंत, सुग्रीव, हनुमान और वानरी सेना जय श्री राम के जयघोष कर रही थी।

झांकी बाजारों से गुजरती हुई दशहरा मैदान में राम ने अपनी सेना के साथ शस्त्र पूजन कर मां चंडिका और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। यहां पहुंचने पर राम और लक्ष्मण ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों पर अग्निबाण छोड़े।

बाण लगते ही पुतला धू-धू कर जलने लगा और सत्य का प्रकाश चारों तरफ फैल गया। लोग श्रीराम का जयघोष करने लगे। उसके बाद राम ने विभिषण का राज्याभिषेक किया।

बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाने वाला पर्व दशहरा

इस अवसर पर राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की रथ यात्रा ट्रैक्टर से निकाली गई व भागवान राम के जयघोष किए गए। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा बड़े धूमधाम से मनाया गया। वही हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दशहरा मैदान में रावण,के पुतले को अग्नि के हवाले किया गया।

इन पुतलों को बनाने का काम यहां पर तीन- चार दिन पहले शुरू किया गया था। शाम के समय मंदिरों में मेले जैसा माहौल रहा और माता के भक्तों ने भजन- कीर्तन किया और सुख- शांति की प्रार्थना की।

पूरे नवरात्र में यहां पर दशहरे तक श्री हनुमान झांकी निकलती रही और लोग उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेसब्री से उनका इंतजार करते दिखे। शाम चार बजे हनुमान मंदिर से राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झांकी मंदिर से निकली और पूरे बाजार का चक्कर लगाने के बाद वापस हनुमान मंदिर पहुंची,

जहां पर रावण के पुतले को श्री राम ने वाणों से अग्नि भेंट की और एकाएक पटाखों की आवाज से पूरा कस्बा गूंज उठा।
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