खेत खलिहान सब कुछ बराबर बंट गया मगर बाप के सिर पर कर्जे अधूरे रह गए – उपेंद्र नादान

न्यूज 22 इंडिया
सूरतगंज बाराबंकी
नव दुर्गा जागरण कमेटी बुढ़वल के तत्वाधान में महाकवि मृगेश जी की पावन धरा पर एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन माने जाने हास्य कवि बिहारी लाल अंबर इलाहाबादी ने किया।

संचालन के दौरान श्री अम्बर ने तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा,दोनों की वोट पाकर तू प्रधान बनेगा जैसी रचनाएं सुनकर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कवि सम्मेलन की शुरुआत सरस्वती वंदना से कुमार पुष्पेंद्र मसौली ने की। कवि उपेंद्र सिंह नादान ने पढ़ा कशमकश में यूँ कई रिश्ते अधूरे रह गए।

जिंदगी तेरे बहुत किस्से अधूरे रह गए। इक कमी मुस्कान की तस्वीर में बाकी मगर, यूँ लगे जैसे कई हिस्से अधूरे रह गए। देर तक शिकवे गिले,शिकवे गिले होते रहे, मसअले फिर भी मेरे सारे अधूरे रह गए। खेत भी खलिहान भी सबकुछ बराबर बँट गया, बाप के सिर पे मगर कर्जे अधूरे रह गए।

अनुराग विश्वकर्मा बांदा ने पढ़ा हर चुनौती को वो बान देता रहा,और बच्चों को मुस्कान देता रहा,इक पिता अपने परिवार के वास्ते अपनी खुशियों का बलिदान देता रहा। कुमार पुष्पेंद्र ने पढ़ा देशवा आपन फंसा मझधार खेवैया नईया पार कै देहेव।

कवि चेतराम अज्ञानी लखनऊ,अनुराग विश्वकर्मा बांदा,नागेंद्र सिंह बाराबंकी,सुनील झंझटी,निलेश नादान कोटवा,कार्यक्रम संयोजक आकाश उमंग बंगाली बाबा ने हास्य एवं व्यंग की कविताओं से लोगों को सराबोर कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट पूरी रात से क्षेत्र गुंजायमान रहा।
रिपोर्ट-सत्यवान पाल

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