धर्म के मर्म को जीवंत बनाते अयोध्या के संजय दास

श्री श्री 1008 महंत ज्ञान दास जी महाराज के उत्तराधिकारी हैं स्वामी संजय दास

श्री हनुमान गढ़ी की युवा संत धर्म को धारण करने पर देते हैं बल

कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया)

अयोध्या उत्तर प्रदेश

आकर्षक व्यक्तित्व, साधारण वेशभूषा एवं मृदु व्यवहार के धनी अयोध्या के युवा संत स्वामी संजय दास जी महाराज से जो एक बार मिलता है! बस उन्हीं का होकर रह जाता है।

धर्म को आचरण में धारण करने पर बल प्रदान करने वाले इस युवा संत ने भक्ति मार्ग के साथ मानव सेवा को भी गति प्रदान करना जारी कर रखा है। संजय दास के इस अलौकिक कर्तव्य अभियान में देश के तमाम लोग तेजी से जुड़ते जा रहे हैं।

श्री हनुमान गढ़ी के श्री श्री1008 महंत ज्ञान दास जी महाराज के उत्तराधिकारी स्वामी संजय दास जी महाराज वास्तव में धर्म के सेवा मर्म को जीवंत बनाते नजर आते हैं। अयोध्या के इस युवा संत ने धर्म को आचरण में धारण करने पर बल प्रदान करने का अभियान चला रखा है।

उनकी यही सोच उन्हें आज के युवा संतो से अलग खड़ा करती है। संजय दास जी महाराज अपने सतगुरु की सेवा में कोई भी कोताही नहीं बरतते ।परम पूज्य गुरुदेव को कब क्या आवश्यकता है ,इसका पूरा ध्यान वह स्वयं रखते हैं।

इसके अलावा सद्गुरु से जुड़े तमाम कार्यों एवं आश्रमों तथा मंदिरों की व्यवस्था पर भी उनकी सटीक नजर रहती है। श्री हनुमान गढ़ी मंदिर में जो उनके कर्तव्य है अथवा काम है। उसे भी सहजता के साथ समय पर पूरा करने में संजय दास अग्रणी नजर आते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि शिष्य परंपरा को निभाने के साथ ही उत्तराधिकारी कर्तव्य पथ पर चलते हुए भक्ति मार्ग के भजन में रमते हुए भी संजय दास मानव सेवा का समय निकाल ही लेते हैं।

समय-समय पर भंडारा करना, अन्न दान क्षेत्र की ओर लगातार बढ़ते जाना, दूरदराज से आने वाले भक्तों की यथासंभव मदद करना, अयोध्या धाम का नाम कोई बहुरूपिया संत बदनाम न करें ।

इस पर भी तीक्ष्ण दृष्टि रखना संजय दास जी का प्राथमिक कार्य है। स्वामी संजय दास से जब विभिन्न मुद्दों पर आज बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि धर्म मानने से ज्यादा आचरण में धारण करने का मंत्र है।

हम भगवान से जुड़े तमाम संस्मरण सुनते हैं। लेकिन प्रभु ने मानव जीवन में जो मर्यादाएं स्थापित की हैं। उनका पालन अपने जीवन में करने से दूर भागते हैं।

संजय दास का कहना है कि पूजा -अर्चना, नाम सुमिरन अत्यंत आवश्यक है। धर्म के प्रति समर्पित होना भी जरूरी है ।

लेकिन दुखी एवं निराश, हताश, मानव में नई ऊर्जा प्रदान करना भी एक बड़ा धर्म है ।उन्होंने बताया कि वह इस क्षेत्र में कई काम कर रहे हैं। जिसमें उन्हें आम जनमानस का खूब सहयोग भी मिल रहा है ।

स्वामी संजय दास का लक्ष्य है कि अयोध्या धाम में आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा ना रहे। इसके लिए एक बड़ा काम प्रारंभ हो जो आगे चलकर तीर्थ स्थलों के लिए एक धर्म परायण उदाहरण बन जाए। इसके लिए कुछ काम भी कर रहे हैं।

राजनीति से जुड़े हुए सवालों को संजय दास बड़ी सहजता से टाल जाते हैं। वह समाज सेवा, मानव सेवा एवं भक्ति मार्ग पर तो खूब बात करते हैं पर राजनीत की बातों से परहेज करते हैं ।

काफी कुरेदने पर कहते हैं राजनीति अपनी जगह आवश्यक है और धर्म अपनी जगह अटल रहना चाहिए। राजनीति पर धर्म दंड का अंकुश रहना चाहिए ।

धर्म का प्रचार करने वाले व्यक्ति को राजनीति के प्रचार से आवश्यक दूरी भी रखनी चाहिए । उनका कहना है कि हम छोटे प्रयासों से बड़े-बड़े काम करके राष्ट्र की सेवा को शिखर तक पहुंचा सकते हैं।

क्योंकि हमारा राष्ट्र हमारा देश हम सभी हिंदुस्तानियों का गौरव है ।कुल मिलाकर भक्ति मार्ग पर चलते हुए भी अयोध्या का यह युवा संत धर्म के वास्तविक मर्म को आम जनमानस के हृदय में प्रज्वलित करने का अभियान चला रहा है।

जिसमें संजय दास जी को देश एवं प्रदेश के तमाम युवाओं का खूब सहयोग मिल रहा है। विभिन्न हिंदू त्योहारों पर जरूरतमंदों को मदद करना एवं अन्य तमाम सामाजिक कार्यों में भागीदारी करते हुए अपने सद्गुरु की सेवा में रमे रहना।

ऐसे तमाम यह गुण हैं जो अयोध्या के इस युवा संत को अन्य तमाम युवा संतो से उन्हें अलग खड़ा करते हैं। स्पष्ट है कि युवा स्वामी संजय दास कि यह सोच उन्हें आने वाले समय में अयोध्या से लेकर पूरे देश में एक अत्यंत सम्मानित स्थान प्रदान करने में सहायक होगी।

 

संकटमोचन सेना के जरिए जारी है सेवा कार्य

स्वामी संजय दास जी महाराज अपने परम पूज्य गुरु श्री 1008 महंत ज्ञान दास जी महाराज के द्वारा संस्थापित संकटमोचन सेना हनुमानगढ़ी का भी नेतृत्व करते हैं।

संकटमोचन सेना का गठन प्रदेश के कई जनपदों में पहुंच चुका है। इसके जरिए तमाम सामाजिक कार्य किए जाते हैं।

संजय दास संकटमोचन सेना के स्वरूप को और भी आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं। सेना के द्वारा मानव सेवा के अब तक तमाम कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं ।

कुल मिलाकर संकट मोचन सेना में जिस तेजी से युवा जुड़ रहे हैं उससे यह साफ संकेत हैं कि आने वाले दिनों में यह संगठन धर्म सेवा- मानव सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी हुंकार होगा ।सेना में सहयोग प्रदान करने वाले स्वामी कृष्णकांत दास जी महाराज,

विकास श्रीवास्तव आदि का कहना है कि संकट मोचन सेना शुद्ध रूप से धर्म, भक्ति, कर्तव्य, स्वच्छ विचारों को आगे बढ़ाने के लिए स्थापित की गई है ।संकट मोचन सेना के माध्यम से गौ सेवा के भी कार्य को आगे बढ़ाया जाता है।

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